राष्ट्रीय अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक विकास परिषद
हमारा संकल्प
संविधान, न्याय, समानता और सामाजिक सम्मान की रक्षा हमारा संकल्प
हमारा मूल संकल्प
राष्ट्रीय अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक विकास परिषद का मूल उद्देश्य भारतीय संविधान में प्रत्येक नागरिक को प्राप्त मौलिक अधिकारों, समानता, स्वतंत्रता, सामाजिक न्याय एवं सम्मान की रक्षा करना तथा वंचित, गरीब, पीड़ित, शोषित एवं उत्पीड़ित लोगों को संवैधानिक और लोकतांत्रिक तरीके से न्याय दिलाने के लिए निरंतर संघर्ष करना है।
संगठन का यह स्पष्ट संकल्प है कि किसी भी व्यक्ति के साथ जाति, वर्ग, धर्म, समुदाय, आर्थिक स्थिति अथवा किसी अन्य आधार पर अन्याय, भेदभाव, अपमान या उत्पीड़न स्वीकार नहीं किया जाएगा।
वर्ष 2011 से निरंतर संघर्ष
राष्ट्रीय अध्यक्ष राजेश कुमार सिद्धार्थ के नेतृत्व में परिषद वर्ष 2011 से निरंतर सामाजिक न्याय और संवैधानिक अधिकारों की लड़ाई लड़ती आ रही है।
संगठन द्वारा उत्तर प्रदेश के सीतापुर, लखनऊ, श्रावस्ती, कानपुर नगर, कानपुर देहात, बाराबंकी सहित विभिन्न जनपदों तथा बिहार, दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, गुजरात, हिमाचल प्रदेश, झारखंड, उत्तराखंड सहित अन्य क्षेत्रों में दलित, पिछड़े, आदिवासी एवं अल्पसंख्यक समाज से जुड़े मामलों को उठाया गया है।
जनपद सीतापुर में व्यापक संघर्ष
जनपद सीतापुर परिषद के संघर्ष का प्रमुख केंद्र रहा है। विकास भवन, सीतापुर के सामने तथा जिले के विभिन्न स्थानों पर 2,000 से अधिक धरना-प्रदर्शन, जनसभाओं और आंदोलनों के माध्यम से गरीबों, पीड़ितों एवं वंचित समाज की समस्याओं को प्रशासन और शासन तक पहुंचाने का प्रयास किया गया है।
परिषद का उद्देश्य केवल आंदोलन करना नहीं, बल्कि पीड़ित व्यक्ति को न्याय की प्रक्रिया से जोड़ना, संबंधित अधिकारियों के समक्ष उसकी बात रखना, ज्ञापन देना, कानूनी कार्रवाई की मांग करना और आवश्यकता पड़ने पर न्यायालय का दरवाजा खटखटाना रहा है।
प्रमुख सामाजिक संघर्ष एवं मामले
दलित गोविंद प्रकरण
सीतापुर में दलित गोविंद से संबंधित घटना को लेकर परिषद ने न्याय की मांग को लेकर धरना-प्रदर्शन एवं जनसभा आयोजित की।
मिश्रिख में बौद्ध भिक्षुओं के मामले में आवाज
बौद्ध भिक्षुओं से संबंधित घटना के विरोध में परिषद ने आंदोलन कर न्याय एवं सुरक्षा की मांग उठाई।
दलित वैजयंती प्रकरण
पीड़िता को न्याय, सुरक्षा एवं सम्मान दिलाने की मांग को परिषद द्वारा प्रमुखता से उठाया गया।
बाबा साहेब एवं तथागत गौतम बुद्ध की प्रतिमाओं की सुरक्षा
प्रतिमाओं को क्षति पहुंचाने की घटनाओं के विरोध में धरना-प्रदर्शन एवं ज्ञापन के माध्यम से आवाज उठाई गई।
गोविंद ढाबा प्रकरण
व्यवसाय करने के अधिकार, सम्मानपूर्वक जीवन और कानून के समान संरक्षण की मांग को लेकर आवाज उठाई गई।
जातिसूचक अपमान के विरुद्ध संघर्ष
जातिसूचक अपमान एवं सामाजिक भेदभाव के विरुद्ध न्याय की मांग को लेकर आंदोलन किया गया।
उत्तर प्रदेश से लेकर देश के विभिन्न राज्यों तक संघर्ष
परिषद का कार्य केवल एक जनपद अथवा एक राज्य तक सीमित नहीं है। जहां भी संगठन के संज्ञान में वंचित समाज के लोगों के साथ अन्याय, उत्पीड़न, भेदभाव या संवैधानिक अधिकारों के हनन का मामला आता है, वहां संगठन उपलब्ध संवैधानिक एवं लोकतांत्रिक माध्यमों से आवाज उठाने का प्रयास करता है।
कानपुर में डॉ. आर.सी. कमल तथा कुशीनगर में श्याम बिहारी गौतम सहित संगठन से जुड़े सामाजिक कार्यकर्ताओं द्वारा भी विभिन्न मामलों में आंदोलन और जनहित के कार्य किए जाने का उल्लेख संगठन करता रहा है।
हमारा भविष्य का संकल्प
यदि किसी नागरिक का उत्पीड़न होता है, उसके साथ जातिगत भेदभाव किया जाता है, उसके सम्मान को ठेस पहुंचाई जाती है, उसकी संपत्ति या अधिकारों का अतिक्रमण होता है, पुलिस-प्रशासन द्वारा उसकी शिकायत पर उचित कार्रवाई नहीं होती अथवा उसके मौलिक अधिकारों का उल्लंघन होता है, तो परिषद कानूनी और संवैधानिक प्रक्रिया के तहत उसकी आवाज उठाने का प्रयास करेगी।
सड़क से लेकर संसद तक संवैधानिक संघर्ष
परिषद का संकल्प है कि न्याय की लड़ाई गांव से लेकर जिला मुख्यालय तक, तहसील से लेकर शासन तक और आवश्यकता पड़ने पर सड़क से लेकर संसद तक लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक माध्यमों से उठाई जाएगी।
संगठन किसी व्यक्ति, समुदाय या संस्था के विरुद्ध गैरकानूनी कार्रवाई का समर्थन नहीं करता। हमारा मार्ग भारतीय संविधान, कानून, लोकतंत्र, शांतिपूर्ण आंदोलन और न्यायिक प्रक्रिया है।
हमारा मूल मंत्र
हमारा संकल्प
- संविधान की रक्षा
- न्याय की स्थापना
- समानता का अधिकार
- सम्मान के साथ जीवन
- हर पीड़ित को न्याय
हमारी सामाजिक न्याय यात्रा
राष्ट्रीय अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक विकास परिषद यह संकल्प दोहराती है कि जब तक समाज के अंतिम व्यक्ति को न्याय, सम्मान और उसके संवैधानिक अधिकारों की वास्तविक सुरक्षा नहीं मिलती, तब तक सामाजिक न्याय की यह यात्रा निरंतर जारी रहेगी।
सहयोग / भुगतान
सामाजिक न्याय, शिक्षा, समानता और जरूरतमंद लोगों के सहयोग के लिए परिषद के सामाजिक कार्यों में अपना योगदान दें।
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राष्ट्रीय अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति,
पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक विकास परिषद
न्याय, सम्मान, शिक्षा, समानता और संविधान की रक्षा का संकल्प
हमारा उद्देश्य
समाज का कोई भी व्यक्ति केवल इसलिए अन्याय, भेदभाव, शोषण, अत्याचार या अभाव का शिकार न हो कि वह गरीब है, भूमिहीन है, वंचित वर्ग से आता है या उसके पास अपनी आवाज़ को शासन-प्रशासन तक पहुँचाने के साधन नहीं हैं।
राष्ट्रीय अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक विकास परिषद का उद्देश्य उन लोगों की आवाज़ बनना है, जिनकी आवाज़ अक्सर व्यवस्था के शोर में दब जाती है।
हमारा विश्वास है कि भारतीय संविधान केवल एक पुस्तक नहीं, बल्कि करोड़ों वंचित और शोषित लोगों के अधिकारों, सम्मान और भविष्य की सुरक्षा का सबसे बड़ा आधार है।
“जहाँ अन्याय होगा, वहाँ हमारी आवाज़ होगी।
जहाँ शोषण होगा, वहाँ हमारा संघर्ष होगा।
जहाँ कोई बेसहारा होगा, वहाँ हमारा सहयोग होगा।
और जहाँ संविधान पर आंच आएगी, वहाँ लोकतांत्रिक तरीके से हमारी आवाज़ बुलंद होगी।”
हमारे प्रमुख उद्देश्य एवं सामाजिक संकल्प
अत्याचार के विरुद्ध न्याय की आवाज़
अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक समाज के लोगों के साथ होने वाले कथित जुल्म, ज्यादती, भेदभाव, उत्पीड़न एवं अन्याय के मामलों में संविधान एवं लागू कानूनों के दायरे में आवाज़ उठाना। पीड़ितों की समस्याओं को संबंधित विभाग एवं प्रशासन तक पहुँचाना तथा आवश्यकतानुसार लोकतांत्रिक माध्यमों से न्याय की मांग करना।
अधिकारों और सरकारी योजनाओं के प्रति जागरूकता
समाज के अंतिम व्यक्ति तक संविधान द्वारा दिए गए अधिकारों तथा केंद्र एवं राज्य सरकार द्वारा संचालित जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी पहुँचाना, ताकि पात्र व्यक्ति जानकारी के अभाव में अपने अधिकार या योजना के लाभ से वंचित न रहे।
पीड़ितों की समस्याओं पर पहल
अन्याय या उत्पीड़न के शिकार व्यक्ति की समस्या को लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक माध्यमों से संबंधित अधिकारियों के समक्ष उठाने का प्रयास करना।
गरीब बेटियों के विवाह में सहयोग
जरूरतमंद परिवारों की निर्धन कन्याओं के विवाह में जनसहयोग के माध्यम से यथासंभव सहायता उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाएगा।
गरीब विद्यार्थियों की शिक्षा में सहयोग
जरूरतमंद विद्यार्थियों को प्रवेश, फीस, पुस्तकें, कॉपियां एवं आवश्यक शैक्षणिक सहयोग उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाएगा।
दैवीय एवं प्राकृतिक आपदा में सहयोग
बाढ़, आग, अतिवृष्टि, आंधी, दुर्घटना या अन्य आपदा से प्रभावित जरूरतमंद परिवारों को उपलब्ध संसाधनों एवं जनसहयोग के माध्यम से सहायता देने का प्रयास किया जाएगा।
गंभीर बीमारी में आर्थिक सहयोग
आर्थिक अभाव के कारण उपचार में कठिनाई झेल रहे गरीब परिवारों को जनसहयोग के माध्यम से यथासंभव सहायता करने का प्रयास किया जाएगा।
सड़क दुर्घटना पीड़ितों की सहायता
सड़क दुर्घटना में घायल गरीब एवं जरूरतमंद लोगों के उपचार में सहायता तथा परिस्थितियों के अनुसार आर्थिक सहयोग उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाएगा।
प्रतिभाओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं का सम्मान
प्रतिभाशाली छात्र-छात्राओं, उत्कृष्ट सामाजिक कार्यकर्ताओं तथा समाजहित में योगदान देने वाले व्यक्तियों को समय-समय पर सम्मानित करके उनका उत्साह बढ़ाया जाएगा।
समाज की आवाज़ को संगठित करना
समाज की समस्याओं को सामूहिक सामाजिक विषय के रूप में उठाना तथा शांतिपूर्ण, लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक तरीके से समाधान की दिशा में प्रयास करना।
प्रत्येक माह जनसुनवाई
प्रत्येक माह की 30 तारीख को प्रत्येक जनपद में जनसुनवाई आयोजित करने का प्रयास किया जाएगा। जनसमस्याओं को संबंधित जिला प्रशासन के समक्ष उठाया जाएगा।
संविधान की रक्षा एवं सम्मान
संविधान की मूल भावना, समानता, स्वतंत्रता, न्याय एवं बंधुता के संबंध में कानून के दायरे में शांतिपूर्ण जनजागरूकता, जनसभा, संगोष्ठी एवं ज्ञापन के माध्यम से अपनी बात रखी जाएगी।
भूमिहीन परिवारों के अधिकारों की मांग
पात्र गरीब एवं भूमिहीन परिवारों को नियमानुसार सरकारी भूमि, पट्टा एवं आवासीय अधिकार उपलब्ध कराने के लिए शासन-प्रशासन के समक्ष मांग एवं पत्राचार किया जाएगा।
आवास एवं शौचालय का अधिकार
पात्र एवं जरूरतमंद परिवारों को आवास एवं शौचालय जैसी मूलभूत सुविधाओं का लाभ दिलाने के लिए प्रशासन के समक्ष आवाज़ उठाई जाएगी।
गरीब बच्चों के लिए शिक्षा का अवसर
आर्थिक रूप से कमजोर एवं पात्र बच्चों को शिक्षा से जोड़ने के लिए सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने तथा उपलब्ध अवसरों के माध्यम से शिक्षा के अवसर सुनिश्चित कराने की मांग की जाएगी।
बहुजन महापुरुषों के विचारों का प्रचार-प्रसार
डॉ. भीमराव आंबेडकर, महात्मा ज्योतिबा फुले, माता सावित्रीबाई फुले, छत्रपति शाहूजी महाराज, पेरियार एवं अन्य सामाजिक सुधारकों तथा बहुजन महापुरुषों के जीवन, संघर्ष और विचारों से समाज को परिचित कराने के लिए कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
समान एवं गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की मांग
परिषद ऐसी शिक्षा व्यवस्था की मांग करेगी जिसमें प्रत्येक बच्चे को समान, गुणवत्तापूर्ण एवं सम्मानजनक शिक्षा का अवसर प्राप्त हो।
आरक्षण व्यवस्था के प्रभावी क्रियान्वयन की मांग
संविधान एवं लागू कानूनों के अनुरूप आरक्षण व्यवस्था के प्रभावी क्रियान्वयन तथा पात्र वंचित वर्गों को उनके संवैधानिक अधिकारों का लाभ सुनिश्चित करने की मांग उठाई जाएगी।
पुलिस व्यवस्था में प्रतिनिधित्व की मांग
पुलिस विभाग में विभिन्न स्तरों पर संविधान एवं कानून के अनुरूप प्रतिनिधित्व और आरक्षण से जुड़े अधिकारों के प्रभावी क्रियान्वयन की मांग उठाई जाएगी।
शिक्षण संस्थानों में संवैधानिक प्रावधानों का पालन
विद्यालयों, महाविद्यालयों एवं अन्य शिक्षण संस्थानों में लागू संवैधानिक एवं कानूनी प्रावधानों के अनुरूप आरक्षण एवं समान अवसर की व्यवस्था का पालन सुनिश्चित कराने की मांग की जाएगी।
न्यायपालिका में समान प्रतिनिधित्व की मांग
न्यायपालिका में वंचित एवं प्रतिनिधित्व से वंचित वर्गों की भागीदारी तथा नियुक्तियों में संविधान और कानून के अनुरूप समान अवसर एवं उचित प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने की मांग लोकतांत्रिक तरीके से उठाई जाएगी।
हमारा संकल्प
हम किसी व्यक्ति के खिलाफ नहीं, अन्याय के खिलाफ हैं।
हम किसी जाति या समुदाय के विरोध में नहीं, बल्कि भेदभाव और शोषण के विरोध में हैं।
हमारा संघर्ष किसी व्यक्ति को कमजोर करने के लिए नहीं, बल्कि कमजोर व्यक्ति को मजबूत बनाने के लिए है।
हमारा उद्देश्य समाज को बांटना नहीं, बल्कि संविधान, समानता, न्याय और मानवता के आधार पर समाज को जोड़ना है।
हम चाहते हैं कि गरीब की बेटी भी सम्मान से विवाह करे।
गरीब का बच्चा भी अच्छे विद्यालय में पढ़े।
बीमार व्यक्ति पैसे के अभाव में इलाज से वंचित न हो।
दुर्घटना में घायल व्यक्ति को अकेला न छोड़ा जाए।
भूमिहीन परिवार को अधिकार मिले।
पीड़ित की शिकायत सुनी जाए।
“मैं अकेला नहीं हूँ, मेरे साथ समाज खड़ा है।”
हमारा संदेश
- न्याय के लिए आवाज़ उठाइए।
- अधिकारों के लिए जागरूक बनिए।
- जरूरतमंद की मदद कीजिए।
- संविधान का सम्मान कीजिए।
- भेदभाव का विरोध कीजिए।
- एक ऐसे भारत के निर्माण में योगदान दीजिए, जहाँ हर व्यक्ति को सम्मान, समान अवसर और न्याय मिले।
आइए, एकजुट हों
जागरूक बनें — अधिकार समझें — जरूरतमंद का सहारा बनें।
न्याय • समानता • शिक्षा • सम्मान • सेवा • संविधान
सहयोग / भुगतान फॉर्म
समाज, शिक्षा, न्याय और जरूरतमंद लोगों के सहयोग के लिए अपना योगदान दें।
💳 सहयोग करें और भुगतान करेंसंगठन द्वारा जरूरतमंद लोगों की सहायता के 21 प्रमुख क्षेत्र
राष्ट्रीय अनुसूचित जाति, जनजाति, पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक विकास परिषद वर्ष 2011 से सामाजिक न्याय, मानवाधिकार और जनसेवा के क्षेत्र में निरंतर कार्य करती आ रही है।
संगठन अपनी उपलब्ध क्षमता एवं संसाधनों के अनुसार जरूरतमंद लोगों की सहायता के लिए निम्न 21 क्षेत्रों में सहयोग करने का प्रयास करता है।
गरीब परिवार की बेटी की शादी
गरीब परिवार की बेटी की शादी में आर्थिक अथवा आवश्यक सामग्री के रूप में सहयोग।
सड़क दुर्घटना पीड़ितों की सहायता
सड़क दुर्घटना के पीड़ितों एवं उनके परिवारों को यथासंभव आर्थिक और सामाजिक सहायता।
प्राकृतिक एवं दैवीय आपदा
बाढ़, आग, आंधी, अतिवृष्टि आदि से प्रभावित परिवारों की यथासंभव मदद।
गंभीर बीमारी में सहायता
गंभीर बीमारी से जूझ रहे जरूरतमंद व्यक्ति को उपलब्ध संसाधनों के अनुसार आर्थिक सहयोग एवं मार्गदर्शन।
अनाथ एवं असहाय बच्चों का सहयोग
अनाथ एवं असहाय बच्चों की शिक्षा और आवश्यक जरूरतों में सहयोग का प्रयास।
गरीब विद्यार्थियों की शिक्षा
गरीब विद्यार्थियों को शिक्षा, किताबें, फीस एवं अन्य आवश्यक शैक्षिक सहायता दिलाने का प्रयास।
विधवा एवं निराश्रित महिलाओं की सहायता
विधवा एवं निराश्रित महिलाओं को आवश्यकता के समय सामाजिक एवं आर्थिक सहयोग।
दिव्यांग एवं अत्यंत जरूरतमंद व्यक्ति
दिव्यांग एवं अत्यंत जरूरतमंद व्यक्तियों को उपलब्ध संसाधनों के अनुसार सहायता।
राशन एवं दैनिक उपयोग की सामग्री
गरीब परिवारों को राशन एवं आवश्यक दैनिक उपयोग की सामग्री उपलब्ध कराने का प्रयास।
भूमिहीन एवं गरीब परिवारों के अधिकार
भूमिहीन एवं गरीब परिवारों के अधिकारों के लिए संबंधित अधिकारियों के समक्ष आवाज उठाना।
अन्याय एवं अत्याचार के मामलों में सहयोग
दलित, आदिवासी, पिछड़े एवं अल्पसंख्यक समाज पर होने वाले अन्याय और अत्याचार के मामलों में सामाजिक सहयोग।
जातिगत भेदभाव एवं सामाजिक उत्पीड़न
जातिगत भेदभाव एवं सामाजिक उत्पीड़न के मामलों में पीड़ित को उचित कानूनी एवं प्रशासनिक मार्गदर्शन।
महिलाओं के उत्पीड़न के मामले
महिलाओं के साथ होने वाले उत्पीड़न एवं अन्याय के मामलों में नियमानुसार सहायता और संबंधित अधिकारियों तक आवाज पहुंचाना।
किसानों की समस्याएँ
भूमि, मुआवजा, फसल एवं अन्य अधिकारों से जुड़े किसानों के मामलों में सहयोग।
मजदूर एवं श्रमिक अधिकार
मजदूरों एवं श्रमिकों के अधिकारों से जुड़े मामलों में सहायता और न्याय के लिए संघर्ष।
बेरोजगार युवाओं का मार्गदर्शन
बेरोजगार युवाओं को रोजगार, स्वरोजगार एवं सरकारी योजनाओं की जानकारी दिलाने का प्रयास।
सरकारी योजनाओं की जानकारी
सरकारी योजनाओं एवं संवैधानिक अधिकारों का लाभ जरूरतमंदों तक पहुंचाने के लिए जागरूकता और मार्गदर्शन।
पुलिस एवं प्रशासनिक मामलों में मार्गदर्शन
पुलिस, प्रशासन अथवा अन्य संस्थाओं से जुड़े उत्पीड़न के मामलों में नियमानुसार शिकायत एवं न्यायिक प्रक्रिया में मार्गदर्शन।
कानूनी एवं विधिक सहायता
कानूनी सहायता की आवश्यकता वाले जरूरतमंद लोगों को उपलब्ध संसाधनों के अनुसार न्यायिक सहायता या उचित विधिक मार्गदर्शन दिलाने का प्रयास।
अचानक आर्थिक संकट में राहत
अचानक आर्थिक संकट में फंसे गरीब परिवारों को संगठन की उपलब्ध सहायता राशि एवं समाज के सहयोग से राहत पहुंचाने का प्रयास।
अन्य गंभीर मानवीय आवश्यकता
किसी भी अन्य गंभीर एवं मानवीय आवश्यकता के समय, संगठन उपलब्ध संसाधनों और समाज के सहयोग से जरूरतमंद व्यक्ति या परिवार के साथ खड़े होने का प्रयास करेगा।
आपका छोटा-सा सहयोग, किसी जरूरतमंद के लिए बड़ी उम्मीद बन सकता है।
इन जनसेवा कार्यों को निरंतर चलाने के लिए समाज के सभी सम्मानित नागरिकों से अपील है कि वे अपनी इच्छा और सामर्थ्य के अनुसार ₹1 से लेकर जितना संभव हो उतना सहयोग संगठन को प्रदान करें।
आपका छोटा-सा सहयोग किसी जरूरतमंद परिवार के लिए बड़ी उम्मीद बन सकता है। संगठन का संकल्प है कि उपलब्ध संसाधनों के अनुसार आर्थिक, सामाजिक एवं न्यायिक सहायता के लिए हर संभव प्रयास किया जाता रहेगा।
आइए, हम सब मिलकर ऐसा समाज बनाएं, जहां संकट के समय कोई गरीब, असहाय और जरूरतमंद व्यक्ति अकेला न रहे।
परिषद की प्राथमिकताएं
राष्ट्रीय अनुसूचित जाति, जनजाति, पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक विकास परिषद का मूल उद्देश्य समाज के वंचित, शोषित, पीड़ित, गरीब एवं जरूरतमंद लोगों के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा, सामाजिक सम्मान, न्याय एवं विकास के लिए निरंतर कार्य करना है।
संवैधानिक अधिकारों की रक्षा
भारतीय संविधान में दिए गए मौलिक, सामाजिक, आर्थिक एवं राजनीतिक अधिकारों के प्रति समाज को जागरूक करना।
सामाजिक न्याय
अनुसूचित जाति, जनजाति, पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक समाज को समान अवसर और सम्मान दिलाने के लिए प्रयास करना।
अत्याचार एवं शोषण के विरुद्ध संघर्ष
किसी भी प्रकार के अन्याय, भेदभाव, उत्पीड़न और अत्याचार के विरुद्ध संवैधानिक एवं कानूनी तरीके से आवाज उठाना।
आरक्षण के अधिकार की रक्षा
शिक्षा, रोजगार एवं प्रतिनिधित्व में संविधान एवं कानून के अनुसार प्राप्त आरक्षण के अधिकारों की रक्षा के लिए जनजागरूकता एवं संघर्ष।
शिक्षा का विस्तार
गरीब एवं वंचित वर्ग के बच्चों और युवाओं को शिक्षा के प्रति जागरूक करना तथा शैक्षिक अवसरों के लिए प्रयास करना।
रोजगार एवं स्वरोजगार
बेरोजगार युवाओं को रोजगार, कौशल विकास, स्वरोजगार एवं सरकारी योजनाओं की जानकारी उपलब्ध कराने का प्रयास।
महिला सशक्तिकरण
महिलाओं को शिक्षा, सुरक्षा, सम्मान, रोजगार और उनके कानूनी एवं संवैधानिक अधिकारों के प्रति जागरूक करना।
किसान हितों की रक्षा
किसानों की भूमि, फसल, उचित मूल्य, मुआवजा एवं अन्य अधिकारों से जुड़े मुद्दों को उठाना।
मजदूर एवं श्रमिक हित
श्रमिकों को उनके अधिकारों, मजदूरी, सुरक्षा एवं सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के प्रति जागरूक करना।
गरीब एवं जरूरतमंद परिवारों की सहायता
शादी, दुर्घटना, बीमारी, दैवीय आपदा अथवा अचानक आए आर्थिक संकट में उपलब्ध संसाधनों के अनुसार सहायता का प्रयास।
कानूनी एवं न्यायिक सहायता
पीड़ित एवं जरूरतमंद लोगों को शिकायत, आवेदन, विधिक प्रक्रिया तथा संबंधित सरकारी संस्थाओं तक अपनी बात पहुंचाने में मार्गदर्शन देना।
भूमि अधिकारों की रक्षा
गरीब, भूमिहीन एवं वंचित परिवारों की भूमि से जुड़े मामलों में नियमानुसार न्याय के लिए आवाज उठाना।
स्वास्थ्य एवं चिकित्सा सहायता
गरीब एवं जरूरतमंद लोगों को स्वास्थ्य सुविधाओं तथा सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं की जानकारी और सहायता दिलाने का प्रयास।
युवाओं की भागीदारी
युवाओं को सामाजिक परिवर्तन, लोकतंत्र, संविधान एवं जनसेवा से जोड़ना।
संवैधानिक एवं लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा
लोकतंत्र, समानता, स्वतंत्रता, बंधुता और न्याय की भावना को मजबूत करना।
महापुरुषों के विचारों का प्रचार-प्रसार
डॉ. भीमराव आंबेडकर, ज्योतिबा फुले, सावित्रीबाई फुले, छत्रपति शाहूजी महाराज, पेरियार एवं अन्य समाज सुधारकों के विचारों के प्रति समाज को जागरूक करना।
भेदभाव-मुक्त समाज का निर्माण
जाति, वर्ग, भाषा, क्षेत्र या किसी अन्य आधार पर होने वाले भेदभाव के विरुद्ध सामाजिक जागरूकता पैदा करना।
सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने में सहयोग
पात्र लोगों को सरकारी योजनाओं, छात्रवृत्ति, पेंशन, आवास, रोजगार एवं सामाजिक सुरक्षा कार्यक्रमों की जानकारी देना।
आपदा एवं संकट के समय राहत कार्य
बाढ़, आग, दुर्घटना, प्राकृतिक आपदा या अन्य आपातकालीन परिस्थितियों में समाज के सहयोग से राहत पहुंचाने का प्रयास।
जनजागरूकता एवं संगठन निर्माण
गांव-गांव, बूथ-बूथ और क्षेत्र-क्षेत्र में संविधान, अधिकारों और सामाजिक न्याय के प्रति जागरूकता अभियान चलाना।
एकजुट एवं आत्मनिर्भर समाज का निर्माण
अनुसूचित जाति, जनजाति, पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक समाज के लोगों को आपसी सहयोग, भाईचारे और संगठनात्मक एकता के माध्यम से मजबूत बनाना।
न्याय के लिए संघर्ष, जरूरतमंद के लिए सहयोग और संविधान की रक्षा— यही परिषद की प्राथमिकता है।
परिषद का प्रयास रहेगा कि समाज का कोई भी पीड़ित, गरीब, शोषित या जरूरतमंद व्यक्ति स्वयं को अकेला महसूस न करे।
उपलब्ध संसाधनों एवं समाज के सहयोग से आर्थिक, सामाजिक, शैक्षिक और न्यायिक सहायता के लिए हर संभव प्रयास किया जाता रहेगा।
आइए, जनसेवा के इस प्रयास को मजबूत बनाएं
आपकी छोटी-सी सहायता भी किसी जरूरतमंद व्यक्ति या परिवार के लिए बड़ी उम्मीद बन सकती है। अपनी इच्छा और सामर्थ्य के अनुसार जनसेवा के इस प्रयास में सहयोग करें।
🤝 सहयोग करेंबहुजन समाज के नाम खुला संदेश
उठो, जागो और अपने संवैधानिक अधिकारों के लिए एकजुट होकर संघर्ष करो
जय भीम! जय भारत! जय संविधान! जय लोकतंत्र!
मेरे अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, पिछड़ा वर्ग और अल्पसंख्यक समाज के सम्मानित भाइयों, बहनों, नौजवानों, किसानों, मजदूरों, विद्यार्थियों एवं बुद्धिजीवी साथियों!
आज मैं आप सबसे एक ऐसा प्रश्न पूछना चाहता हूँ, जो केवल मेरा नहीं, बल्कि पूरे बहुजन समाज के भविष्य का प्रश्न है।
आज़ादी के 80 वर्ष बीत जाने के बाद क्या बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर द्वारा रचित भारतीय संविधान में दिए गए अधिकार, आरक्षण, सामाजिक न्याय और समान भागीदारी का लाभ हमारे समाज को वास्तव में मिला है?
क्या न्यायपालिका, कार्यपालिका, व्यवस्थापिका और मीडिया में हमारी भागीदारी संविधान की भावना के अनुरूप सुनिश्चित हुई है?
यदि आपका उत्तर "नहीं" है
तो हमें गंभीर आत्ममंथन करने और अपने अधिकारों के प्रति जागरूक होकर लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक तरीके से आगे बढ़ने की आवश्यकता है।
हमारा सबसे बड़ा दोष क्या है?
मेरा मानना है कि हमारे समाज की सबसे बड़ी कमजोरी यह है कि हम चुनाव के समय कुछ नेताओं के बहकावे में आकर, शराब, धोती, साड़ी, कपड़े, पैसे या छोटे-छोटे लालच में अपना अमूल्य वोट बेच देते हैं।
हमारा वोट प्रधान से लेकर प्रधानमंत्री तक सरकार बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसलिए अपने मताधिकार का सोच-समझकर और स्वतंत्र रूप से प्रयोग करना आवश्यक है।
बाबा साहेब का संदेश और हमारा दायित्व
बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर ने हमें ऐसा संविधान दिया, जिसमें सामाजिक, राजनीतिक, आर्थिक और न्यायिक अधिकारों की व्यवस्था की गई है।
उन्होंने हमें शिक्षा, संगठन और संघर्ष का मार्ग दिखाया। हमारा दायित्व है कि हम संविधान को पढ़ें, समझें और अपने अधिकारों के प्रति जागरूक बनें।
80 साल बाद भी समाज की हालत क्यों नहीं बदली?
ज़रा अपने गाँव की ओर नज़र उठाकर देखिए।
- टूटी हुई सड़कें।
- बजबजाती नालियाँ।
- गरीब परिवारों के सामने आवास की समस्या।
- बच्चों के सामने गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की चुनौती।
- नौजवानों के सामने बेरोज़गारी की समस्या।
- किसानों पर आर्थिक दबाव।
- मजदूरों को अपने अधिकारों के लिए संघर्ष।
हमें इन समस्याओं के समाधान के लिए जागरूक नागरिक के रूप में लोकतांत्रिक संस्थाओं में भागीदारी बढ़ानी होगी और अपने जनप्रतिनिधियों से जवाबदेही की मांग करनी होगी।
📚 शिक्षा ही सबसे बड़ा हथियार है
बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर ने शिक्षा को सामाजिक परिवर्तन का महत्वपूर्ण माध्यम माना।
हमें अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा दिलाने के लिए हर संभव प्रयास करना चाहिए।
- हमारे बच्चे बड़ी संख्या में IAS, IPS और PCS बनें।
- हमारे बच्चे डॉक्टर, इंजीनियर और वैज्ञानिक बनें।
- हमारे समाज के युवा शिक्षक और प्रोफेसर बनें।
- मीडिया और लोकतांत्रिक संस्थाओं में हमारी भागीदारी बढ़े।
अब और अन्याय बर्दाश्त नहीं
अब समय आ गया है कि हम अपने अधिकारों के लिए सड़क से लेकर संसद तक लोकतांत्रिक और संवैधानिक तरीकों से अपनी आवाज़ उठाएं।
समाज के नाम मेरा संकल्प
मैं अपने समाज से आह्वान करता हूँ—
- अपना वोट कभी मत बेचो।
- अपने बच्चों को शिक्षित करो।
- संविधान पढ़ो और पढ़ाओ।
- अपने अधिकारों को जानो।
- अपने जनप्रतिनिधियों से सवाल पूछो।
- गाँव की ग्रामसभा में भाग लो।
- सरकारी योजनाओं की जानकारी लो।
- अन्याय के खिलाफ कानून के दायरे में आवाज़ उठाओ।
- समाज में एकता, भाईचारा और संगठन को मजबूत करो।
✊ हमारा नारा
वोट हमारा – राज भी हमारा।
धन और धरती सबकी रहेगी,
भूखी जनता अब चुप नहीं रहेगी।
शिक्षित बनो – संगठित बनो – संघर्ष करो।
सड़क से संसद तक,
संविधान की ताकत से अपने अधिकार हासिल करो।
एकजुट होकर आगे बढ़ें
यदि आज भी हम चुप रहे, तो स्वार्थी तत्व हमारे भविष्य को प्रभावित कर सकते हैं। इसलिए जागो, उठो और अपने अधिकारों के लिए एकजुट होकर लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक तरीके से आगे बढ़ो।
आइए, हम सब मिलकर बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर के सपनों का भारत बनाने का संकल्प लें, जहाँ सामाजिक न्याय, समान अवसर, सम्मान और संविधान सर्वोपरि हो।
🇮🇳 समाज के नाम अपील
बहुजन समाज की एकता ही सामाजिक न्याय की सबसे बड़ी ताकत है।
आइए — जागरूक बनें, संगठित हों और संविधान एवं लोकतंत्र के मूल्यों को मजबूत करें।
राष्ट्रीय अध्यक्ष
राष्ट्रीय अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति,
पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक विकास परिषद
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