🇮🇳
राष्ट्रीय अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक विकास परिषद
हमारा संकल्प
संविधान, न्याय, समानता और सामाजिक सम्मान की रक्षा हमारा संकल्प
हमारा मूल संकल्प
राष्ट्रीय अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक
विकास परिषद का मूल उद्देश्य भारतीय संविधान में प्रत्येक नागरिक को
प्राप्त मौलिक अधिकारों, समानता, स्वतंत्रता, सामाजिक न्याय एवं सम्मान
की रक्षा करना तथा वंचित, गरीब, पीड़ित, शोषित एवं उत्पीड़ित लोगों को
संवैधानिक और लोकतांत्रिक तरीके से न्याय दिलाने के लिए निरंतर संघर्ष
करना है।
संगठन का यह स्पष्ट संकल्प है कि किसी भी व्यक्ति के साथ जाति, वर्ग,
धर्म, समुदाय, आर्थिक स्थिति अथवा किसी अन्य आधार पर अन्याय, भेदभाव,
अपमान या उत्पीड़न स्वीकार नहीं किया जाएगा।
“पीड़ित व्यक्ति की आवाज को मजबूती से उठाना और उसे
न्याय की संवैधानिक प्रक्रिया तक पहुंचाना परिषद की
प्राथमिक जिम्मेदारी है।”
वर्ष 2011 से निरंतर संघर्ष
राष्ट्रीय अध्यक्ष राजेश कुमार सिद्धार्थ के नेतृत्व में परिषद वर्ष
2011 से निरंतर सामाजिक न्याय और संवैधानिक अधिकारों की लड़ाई लड़ती
आ रही है।
संगठन द्वारा उत्तर प्रदेश के सीतापुर, लखनऊ, श्रावस्ती, कानपुर नगर,
कानपुर देहात, बाराबंकी सहित विभिन्न जनपदों तथा बिहार, दिल्ली, पंजाब,
हरियाणा, राजस्थान, गुजरात, हिमाचल प्रदेश, झारखंड, उत्तराखंड सहित
अन्य क्षेत्रों में दलित, पिछड़े, आदिवासी एवं अल्पसंख्यक समाज से
जुड़े मामलों को उठाया गया है।
2011
से निरंतर संघर्ष
3,000+
धरना-प्रदर्शन एवं जनसभाएं
5,000+
पीड़ित लोगों को सहयोग
जनपद सीतापुर में व्यापक संघर्ष
जनपद सीतापुर परिषद के संघर्ष का प्रमुख केंद्र रहा है। विकास भवन,
सीतापुर के सामने तथा जिले के विभिन्न स्थानों पर 2,000 से अधिक
धरना-प्रदर्शन, जनसभाओं और आंदोलनों के माध्यम से गरीबों, पीड़ितों
एवं वंचित समाज की समस्याओं को प्रशासन और शासन तक पहुंचाने का
प्रयास किया गया है।
परिषद का उद्देश्य केवल आंदोलन करना नहीं, बल्कि पीड़ित व्यक्ति को
न्याय की प्रक्रिया से जोड़ना, संबंधित अधिकारियों के समक्ष उसकी
बात रखना, ज्ञापन देना, कानूनी कार्रवाई की मांग करना और आवश्यकता
पड़ने पर न्यायालय का दरवाजा खटखटाना रहा है।
प्रमुख सामाजिक संघर्ष एवं मामले
01
दलित गोविंद प्रकरण
सीतापुर में दलित गोविंद से संबंधित घटना को लेकर परिषद ने
न्याय की मांग को लेकर धरना-प्रदर्शन एवं जनसभा आयोजित की।
02
मिश्रिख में बौद्ध भिक्षुओं के मामले में आवाज
बौद्ध भिक्षुओं से संबंधित घटना के विरोध में परिषद ने
आंदोलन कर न्याय एवं सुरक्षा की मांग उठाई।
03
दलित वैजयंती प्रकरण
पीड़िता को न्याय, सुरक्षा एवं सम्मान दिलाने की मांग को
परिषद द्वारा प्रमुखता से उठाया गया।
04
बाबा साहेब एवं तथागत गौतम बुद्ध की प्रतिमाओं की सुरक्षा
प्रतिमाओं को क्षति पहुंचाने की घटनाओं के विरोध में
धरना-प्रदर्शन एवं ज्ञापन के माध्यम से आवाज उठाई गई।
05
गोविंद ढाबा प्रकरण
व्यवसाय करने के अधिकार, सम्मानपूर्वक जीवन और कानून के
समान संरक्षण की मांग को लेकर आवाज उठाई गई।
06
जातिसूचक अपमान के विरुद्ध संघर्ष
जातिसूचक अपमान एवं सामाजिक भेदभाव के विरुद्ध न्याय की
मांग को लेकर आंदोलन किया गया।
उत्तर प्रदेश से लेकर देश के विभिन्न राज्यों तक संघर्ष
परिषद का कार्य केवल एक जनपद अथवा एक राज्य तक सीमित नहीं है। जहां भी
संगठन के संज्ञान में वंचित समाज के लोगों के साथ अन्याय, उत्पीड़न,
भेदभाव या संवैधानिक अधिकारों के हनन का मामला आता है, वहां संगठन
उपलब्ध संवैधानिक एवं लोकतांत्रिक माध्यमों से आवाज उठाने का प्रयास
करता है।
कानपुर में डॉ. आर.सी. कमल तथा कुशीनगर में श्याम बिहारी गौतम सहित
संगठन से जुड़े सामाजिक कार्यकर्ताओं द्वारा भी विभिन्न मामलों में
आंदोलन और जनहित के कार्य किए जाने का उल्लेख संगठन करता रहा है।
हमारा भविष्य का संकल्प
“किसी भी व्यक्ति के साथ अन्याय नहीं होने देंगे,
किसी पीड़ित की आवाज दबने नहीं देंगे और संविधान में
दिए गए अधिकारों की रक्षा के लिए लोकतांत्रिक एवं
संवैधानिक तरीके से निरंतर संघर्ष करेंगे।”
यदि किसी नागरिक का उत्पीड़न होता है, उसके साथ जातिगत भेदभाव किया
जाता है, उसके सम्मान को ठेस पहुंचाई जाती है, उसकी संपत्ति या
अधिकारों का अतिक्रमण होता है, पुलिस-प्रशासन द्वारा उसकी शिकायत पर
उचित कार्रवाई नहीं होती अथवा उसके मौलिक अधिकारों का उल्लंघन होता
है, तो परिषद कानूनी और संवैधानिक प्रक्रिया के तहत उसकी आवाज उठाने
का प्रयास करेगी।
सड़क से लेकर संसद तक संवैधानिक संघर्ष
परिषद का संकल्प है कि न्याय की लड़ाई गांव से लेकर जिला मुख्यालय तक,
तहसील से लेकर शासन तक और आवश्यकता पड़ने पर सड़क से लेकर संसद तक
लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक माध्यमों से उठाई जाएगी।
संगठन किसी व्यक्ति, समुदाय या संस्था के विरुद्ध गैरकानूनी कार्रवाई
का समर्थन नहीं करता। हमारा मार्ग भारतीय संविधान, कानून, लोकतंत्र,
शांतिपूर्ण आंदोलन और न्यायिक प्रक्रिया है।
हमारा मूल मंत्र
जय भीम।
जय भारत।
जय संविधान।
जय लोकतंत्र।
हमारा संकल्प
- संविधान की रक्षा
- न्याय की स्थापना
- समानता का अधिकार
- सम्मान के साथ जीवन
- हर पीड़ित को न्याय
हमारी सामाजिक न्याय यात्रा
राष्ट्रीय अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक
विकास परिषद यह संकल्प दोहराती है कि जब तक समाज के अंतिम व्यक्ति को
न्याय, सम्मान और उसके संवैधानिक अधिकारों की वास्तविक सुरक्षा नहीं
मिलती, तब तक सामाजिक न्याय की यह यात्रा निरंतर जारी रहेगी।
राजेश कुमार सिद्धार्थ
राष्ट्रीय अध्यक्ष
राष्ट्रीय अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, पिछड़ा वर्ग एवं
अल्पसंख्यक विकास परिषद
💳
सहयोग / भुगतान
सामाजिक न्याय, शिक्षा, समानता और जरूरतमंद लोगों के सहयोग के लिए
परिषद के सामाजिक कार्यों में अपना योगदान दें।
💳 सहयोग करें और भुगतान करें