परिषद की प्राथमिकताएं
राष्ट्रीय अनुसूचित जाति, जनजाति, पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक विकास परिषद का मूल उद्देश्य समाज के वंचित, शोषित, पीड़ित, गरीब एवं जरूरतमंद लोगों के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा, सामाजिक सम्मान, न्याय एवं विकास के लिए निरंतर कार्य करना है।
संवैधानिक अधिकारों की रक्षा
भारतीय संविधान में दिए गए मौलिक, सामाजिक, आर्थिक एवं राजनीतिक अधिकारों के प्रति समाज को जागरूक करना।
सामाजिक न्याय
अनुसूचित जाति, जनजाति, पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक समाज को समान अवसर और सम्मान दिलाने के लिए प्रयास करना।
अत्याचार एवं शोषण के विरुद्ध संघर्ष
किसी भी प्रकार के अन्याय, भेदभाव, उत्पीड़न और अत्याचार के विरुद्ध संवैधानिक एवं कानूनी तरीके से आवाज उठाना।
आरक्षण के अधिकार की रक्षा
शिक्षा, रोजगार एवं प्रतिनिधित्व में संविधान एवं कानून के अनुसार प्राप्त आरक्षण के अधिकारों की रक्षा के लिए जनजागरूकता एवं संघर्ष।
शिक्षा का विस्तार
गरीब एवं वंचित वर्ग के बच्चों और युवाओं को शिक्षा के प्रति जागरूक करना तथा शैक्षिक अवसरों के लिए प्रयास करना।
रोजगार एवं स्वरोजगार
बेरोजगार युवाओं को रोजगार, कौशल विकास, स्वरोजगार एवं सरकारी योजनाओं की जानकारी उपलब्ध कराने का प्रयास।
महिला सशक्तिकरण
महिलाओं को शिक्षा, सुरक्षा, सम्मान, रोजगार और उनके कानूनी एवं संवैधानिक अधिकारों के प्रति जागरूक करना।
किसान हितों की रक्षा
किसानों की भूमि, फसल, उचित मूल्य, मुआवजा एवं अन्य अधिकारों से जुड़े मुद्दों को उठाना।
मजदूर एवं श्रमिक हित
श्रमिकों को उनके अधिकारों, मजदूरी, सुरक्षा एवं सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के प्रति जागरूक करना।
गरीब एवं जरूरतमंद परिवारों की सहायता
शादी, दुर्घटना, बीमारी, दैवीय आपदा अथवा अचानक आए आर्थिक संकट में उपलब्ध संसाधनों के अनुसार सहायता का प्रयास।
कानूनी एवं न्यायिक सहायता
पीड़ित एवं जरूरतमंद लोगों को शिकायत, आवेदन, विधिक प्रक्रिया तथा संबंधित सरकारी संस्थाओं तक अपनी बात पहुंचाने में मार्गदर्शन देना।
भूमि अधिकारों की रक्षा
गरीब, भूमिहीन एवं वंचित परिवारों की भूमि से जुड़े मामलों में नियमानुसार न्याय के लिए आवाज उठाना।
स्वास्थ्य एवं चिकित्सा सहायता
गरीब एवं जरूरतमंद लोगों को स्वास्थ्य सुविधाओं तथा सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं की जानकारी और सहायता दिलाने का प्रयास।
युवाओं की भागीदारी
युवाओं को सामाजिक परिवर्तन, लोकतंत्र, संविधान एवं जनसेवा से जोड़ना।
संवैधानिक एवं लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा
लोकतंत्र, समानता, स्वतंत्रता, बंधुता और न्याय की भावना को मजबूत करना।
महापुरुषों के विचारों का प्रचार-प्रसार
डॉ. भीमराव आंबेडकर, ज्योतिबा फुले, सावित्रीबाई फुले, छत्रपति शाहूजी महाराज, पेरियार एवं अन्य समाज सुधारकों के विचारों के प्रति समाज को जागरूक करना।
भेदभाव-मुक्त समाज का निर्माण
जाति, वर्ग, भाषा, क्षेत्र या किसी अन्य आधार पर होने वाले भेदभाव के विरुद्ध सामाजिक जागरूकता पैदा करना।
सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने में सहयोग
पात्र लोगों को सरकारी योजनाओं, छात्रवृत्ति, पेंशन, आवास, रोजगार एवं सामाजिक सुरक्षा कार्यक्रमों की जानकारी देना।
आपदा एवं संकट के समय राहत कार्य
बाढ़, आग, दुर्घटना, प्राकृतिक आपदा या अन्य आपातकालीन परिस्थितियों में समाज के सहयोग से राहत पहुंचाने का प्रयास।
जनजागरूकता एवं संगठन निर्माण
गांव-गांव, बूथ-बूथ और क्षेत्र-क्षेत्र में संविधान, अधिकारों और सामाजिक न्याय के प्रति जागरूकता अभियान चलाना।
एकजुट एवं आत्मनिर्भर समाज का निर्माण
अनुसूचित जाति, जनजाति, पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक समाज के लोगों को आपसी सहयोग, भाईचारे और संगठनात्मक एकता के माध्यम से मजबूत बनाना।
न्याय के लिए संघर्ष, जरूरतमंद के लिए सहयोग और संविधान की रक्षा— यही परिषद की प्राथमिकता है।
परिषद का प्रयास रहेगा कि समाज का कोई भी पीड़ित, गरीब, शोषित या जरूरतमंद व्यक्ति स्वयं को अकेला महसूस न करे।
उपलब्ध संसाधनों एवं समाज के सहयोग से आर्थिक, सामाजिक, शैक्षिक और न्यायिक सहायता के लिए हर संभव प्रयास किया जाता रहेगा।
आइए, जनसेवा के इस प्रयास को मजबूत बनाएं
आपकी छोटी-सी सहायता भी किसी जरूरतमंद व्यक्ति या परिवार के लिए बड़ी उम्मीद बन सकती है। अपनी इच्छा और सामर्थ्य के अनुसार जनसेवा के इस प्रयास में सहयोग करें।
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