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राष्ट्रीय अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति,
पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक विकास परिषद

न्याय, सम्मान, शिक्षा, समानता और संविधान की रक्षा का संकल्प

हमारा उद्देश्य

समाज का कोई भी व्यक्ति केवल इसलिए अन्याय, भेदभाव, शोषण, अत्याचार या अभाव का शिकार न हो कि वह गरीब है, भूमिहीन है, वंचित वर्ग से आता है या उसके पास अपनी आवाज़ को शासन-प्रशासन तक पहुँचाने के साधन नहीं हैं।

राष्ट्रीय अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक विकास परिषद का उद्देश्य उन लोगों की आवाज़ बनना है, जिनकी आवाज़ अक्सर व्यवस्था के शोर में दब जाती है।

हमारा विश्वास है कि भारतीय संविधान केवल एक पुस्तक नहीं, बल्कि करोड़ों वंचित और शोषित लोगों के अधिकारों, सम्मान और भविष्य की सुरक्षा का सबसे बड़ा आधार है।

“जहाँ अन्याय होगा, वहाँ हमारी आवाज़ होगी।
जहाँ शोषण होगा, वहाँ हमारा संघर्ष होगा।
जहाँ कोई बेसहारा होगा, वहाँ हमारा सहयोग होगा।
और जहाँ संविधान पर आंच आएगी, वहाँ लोकतांत्रिक तरीके से हमारी आवाज़ बुलंद होगी।”

हमारे प्रमुख उद्देश्य एवं सामाजिक संकल्प

1

अत्याचार के विरुद्ध न्याय की आवाज़

अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक समाज के लोगों के साथ होने वाले कथित जुल्म, ज्यादती, भेदभाव, उत्पीड़न एवं अन्याय के मामलों में संविधान एवं लागू कानूनों के दायरे में आवाज़ उठाना। पीड़ितों की समस्याओं को संबंधित विभाग एवं प्रशासन तक पहुँचाना तथा आवश्यकतानुसार लोकतांत्रिक माध्यमों से न्याय की मांग करना।

2

अधिकारों और सरकारी योजनाओं के प्रति जागरूकता

समाज के अंतिम व्यक्ति तक संविधान द्वारा दिए गए अधिकारों तथा केंद्र एवं राज्य सरकार द्वारा संचालित जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी पहुँचाना, ताकि पात्र व्यक्ति जानकारी के अभाव में अपने अधिकार या योजना के लाभ से वंचित न रहे।

3

पीड़ितों की समस्याओं पर पहल

अन्याय या उत्पीड़न के शिकार व्यक्ति की समस्या को लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक माध्यमों से संबंधित अधिकारियों के समक्ष उठाने का प्रयास करना।

4

गरीब बेटियों के विवाह में सहयोग

जरूरतमंद परिवारों की निर्धन कन्याओं के विवाह में जनसहयोग के माध्यम से यथासंभव सहायता उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाएगा।

5

गरीब विद्यार्थियों की शिक्षा में सहयोग

जरूरतमंद विद्यार्थियों को प्रवेश, फीस, पुस्तकें, कॉपियां एवं आवश्यक शैक्षणिक सहयोग उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाएगा।

6

दैवीय एवं प्राकृतिक आपदा में सहयोग

बाढ़, आग, अतिवृष्टि, आंधी, दुर्घटना या अन्य आपदा से प्रभावित जरूरतमंद परिवारों को उपलब्ध संसाधनों एवं जनसहयोग के माध्यम से सहायता देने का प्रयास किया जाएगा।

7

गंभीर बीमारी में आर्थिक सहयोग

आर्थिक अभाव के कारण उपचार में कठिनाई झेल रहे गरीब परिवारों को जनसहयोग के माध्यम से यथासंभव सहायता करने का प्रयास किया जाएगा।

8

सड़क दुर्घटना पीड़ितों की सहायता

सड़क दुर्घटना में घायल गरीब एवं जरूरतमंद लोगों के उपचार में सहायता तथा परिस्थितियों के अनुसार आर्थिक सहयोग उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाएगा।

9

प्रतिभाओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं का सम्मान

प्रतिभाशाली छात्र-छात्राओं, उत्कृष्ट सामाजिक कार्यकर्ताओं तथा समाजहित में योगदान देने वाले व्यक्तियों को समय-समय पर सम्मानित करके उनका उत्साह बढ़ाया जाएगा।

10

समाज की आवाज़ को संगठित करना

समाज की समस्याओं को सामूहिक सामाजिक विषय के रूप में उठाना तथा शांतिपूर्ण, लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक तरीके से समाधान की दिशा में प्रयास करना।

11

प्रत्येक माह जनसुनवाई

प्रत्येक माह की 30 तारीख को प्रत्येक जनपद में जनसुनवाई आयोजित करने का प्रयास किया जाएगा। जनसमस्याओं को संबंधित जिला प्रशासन के समक्ष उठाया जाएगा।

12

संविधान की रक्षा एवं सम्मान

संविधान की मूल भावना, समानता, स्वतंत्रता, न्याय एवं बंधुता के संबंध में कानून के दायरे में शांतिपूर्ण जनजागरूकता, जनसभा, संगोष्ठी एवं ज्ञापन के माध्यम से अपनी बात रखी जाएगी।

13

भूमिहीन परिवारों के अधिकारों की मांग

पात्र गरीब एवं भूमिहीन परिवारों को नियमानुसार सरकारी भूमि, पट्टा एवं आवासीय अधिकार उपलब्ध कराने के लिए शासन-प्रशासन के समक्ष मांग एवं पत्राचार किया जाएगा।

14

आवास एवं शौचालय का अधिकार

पात्र एवं जरूरतमंद परिवारों को आवास एवं शौचालय जैसी मूलभूत सुविधाओं का लाभ दिलाने के लिए प्रशासन के समक्ष आवाज़ उठाई जाएगी।

15

गरीब बच्चों के लिए शिक्षा का अवसर

आर्थिक रूप से कमजोर एवं पात्र बच्चों को शिक्षा से जोड़ने के लिए सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने तथा उपलब्ध अवसरों के माध्यम से शिक्षा के अवसर सुनिश्चित कराने की मांग की जाएगी।

16

बहुजन महापुरुषों के विचारों का प्रचार-प्रसार

डॉ. भीमराव आंबेडकर, महात्मा ज्योतिबा फुले, माता सावित्रीबाई फुले, छत्रपति शाहूजी महाराज, पेरियार एवं अन्य सामाजिक सुधारकों तथा बहुजन महापुरुषों के जीवन, संघर्ष और विचारों से समाज को परिचित कराने के लिए कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।

17

समान एवं गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की मांग

परिषद ऐसी शिक्षा व्यवस्था की मांग करेगी जिसमें प्रत्येक बच्चे को समान, गुणवत्तापूर्ण एवं सम्मानजनक शिक्षा का अवसर प्राप्त हो।

18

आरक्षण व्यवस्था के प्रभावी क्रियान्वयन की मांग

संविधान एवं लागू कानूनों के अनुरूप आरक्षण व्यवस्था के प्रभावी क्रियान्वयन तथा पात्र वंचित वर्गों को उनके संवैधानिक अधिकारों का लाभ सुनिश्चित करने की मांग उठाई जाएगी।

19

पुलिस व्यवस्था में प्रतिनिधित्व की मांग

पुलिस विभाग में विभिन्न स्तरों पर संविधान एवं कानून के अनुरूप प्रतिनिधित्व और आरक्षण से जुड़े अधिकारों के प्रभावी क्रियान्वयन की मांग उठाई जाएगी।

20

शिक्षण संस्थानों में संवैधानिक प्रावधानों का पालन

विद्यालयों, महाविद्यालयों एवं अन्य शिक्षण संस्थानों में लागू संवैधानिक एवं कानूनी प्रावधानों के अनुरूप आरक्षण एवं समान अवसर की व्यवस्था का पालन सुनिश्चित कराने की मांग की जाएगी।

21

न्यायपालिका में समान प्रतिनिधित्व की मांग

न्यायपालिका में वंचित एवं प्रतिनिधित्व से वंचित वर्गों की भागीदारी तथा नियुक्तियों में संविधान और कानून के अनुरूप समान अवसर एवं उचित प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने की मांग लोकतांत्रिक तरीके से उठाई जाएगी।

हमारा संकल्प

हम किसी व्यक्ति के खिलाफ नहीं, अन्याय के खिलाफ हैं।

हम किसी जाति या समुदाय के विरोध में नहीं, बल्कि भेदभाव और शोषण के विरोध में हैं।

हमारा संघर्ष किसी व्यक्ति को कमजोर करने के लिए नहीं, बल्कि कमजोर व्यक्ति को मजबूत बनाने के लिए है।

हमारा उद्देश्य समाज को बांटना नहीं, बल्कि संविधान, समानता, न्याय और मानवता के आधार पर समाज को जोड़ना है।

हम चाहते हैं कि गरीब की बेटी भी सम्मान से विवाह करे।

गरीब का बच्चा भी अच्छे विद्यालय में पढ़े।

बीमार व्यक्ति पैसे के अभाव में इलाज से वंचित न हो।

दुर्घटना में घायल व्यक्ति को अकेला न छोड़ा जाए।

भूमिहीन परिवार को अधिकार मिले।

पीड़ित की शिकायत सुनी जाए।

“मैं अकेला नहीं हूँ, मेरे साथ समाज खड़ा है।”

हमारा संदेश

  • न्याय के लिए आवाज़ उठाइए।
  • अधिकारों के लिए जागरूक बनिए।
  • जरूरतमंद की मदद कीजिए।
  • संविधान का सम्मान कीजिए।
  • भेदभाव का विरोध कीजिए।
  • एक ऐसे भारत के निर्माण में योगदान दीजिए, जहाँ हर व्यक्ति को सम्मान, समान अवसर और न्याय मिले।

आइए, एकजुट हों

जागरूक बनें — अधिकार समझें — जरूरतमंद का सहारा बनें।

जय भीम | जय भारत | जय संविधान | जय लोकतंत्र

न्याय • समानता • शिक्षा • सम्मान • सेवा • संविधान

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राष्ट्रीय अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक विकास परिषद

हमारा संकल्प

संविधान, न्याय, समानता और सामाजिक सम्मान की रक्षा हमारा संकल्प

हमारा मूल संकल्प

राष्ट्रीय अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक विकास परिषद का मूल उद्देश्य भारतीय संविधान में प्रत्येक नागरिक को प्राप्त मौलिक अधिकारों, समानता, स्वतंत्रता, सामाजिक न्याय एवं सम्मान की रक्षा करना तथा वंचित, गरीब, पीड़ित, शोषित एवं उत्पीड़ित लोगों को संवैधानिक और लोकतांत्रिक तरीके से न्याय दिलाने के लिए निरंतर संघर्ष करना है।

संगठन का यह स्पष्ट संकल्प है कि किसी भी व्यक्ति के साथ जाति, वर्ग, धर्म, समुदाय, आर्थिक स्थिति अथवा किसी अन्य आधार पर अन्याय, भेदभाव, अपमान या उत्पीड़न स्वीकार नहीं किया जाएगा।

“पीड़ित व्यक्ति की आवाज को मजबूती से उठाना और उसे न्याय की संवैधानिक प्रक्रिया तक पहुंचाना परिषद की प्राथमिक जिम्मेदारी है।”

वर्ष 2011 से निरंतर संघर्ष

राष्ट्रीय अध्यक्ष राजेश कुमार सिद्धार्थ के नेतृत्व में परिषद वर्ष 2011 से निरंतर सामाजिक न्याय और संवैधानिक अधिकारों की लड़ाई लड़ती आ रही है।

संगठन द्वारा उत्तर प्रदेश के सीतापुर, लखनऊ, श्रावस्ती, कानपुर नगर, कानपुर देहात, बाराबंकी सहित विभिन्न जनपदों तथा बिहार, दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, गुजरात, हिमाचल प्रदेश, झारखंड, उत्तराखंड सहित अन्य क्षेत्रों में दलित, पिछड़े, आदिवासी एवं अल्पसंख्यक समाज से जुड़े मामलों को उठाया गया है।

2011 से निरंतर संघर्ष
3,000+ धरना-प्रदर्शन एवं जनसभाएं
5,000+ पीड़ित लोगों को सहयोग

जनपद सीतापुर में व्यापक संघर्ष

जनपद सीतापुर परिषद के संघर्ष का प्रमुख केंद्र रहा है। विकास भवन, सीतापुर के सामने तथा जिले के विभिन्न स्थानों पर 2,000 से अधिक धरना-प्रदर्शन, जनसभाओं और आंदोलनों के माध्यम से गरीबों, पीड़ितों एवं वंचित समाज की समस्याओं को प्रशासन और शासन तक पहुंचाने का प्रयास किया गया है।

परिषद का उद्देश्य केवल आंदोलन करना नहीं, बल्कि पीड़ित व्यक्ति को न्याय की प्रक्रिया से जोड़ना, संबंधित अधिकारियों के समक्ष उसकी बात रखना, ज्ञापन देना, कानूनी कार्रवाई की मांग करना और आवश्यकता पड़ने पर न्यायालय का दरवाजा खटखटाना रहा है।

प्रमुख सामाजिक संघर्ष एवं मामले

01

दलित गोविंद प्रकरण

सीतापुर में दलित गोविंद से संबंधित घटना को लेकर परिषद ने न्याय की मांग को लेकर धरना-प्रदर्शन एवं जनसभा आयोजित की।

02

मिश्रिख में बौद्ध भिक्षुओं के मामले में आवाज

बौद्ध भिक्षुओं से संबंधित घटना के विरोध में परिषद ने आंदोलन कर न्याय एवं सुरक्षा की मांग उठाई।

03

दलित वैजयंती प्रकरण

पीड़िता को न्याय, सुरक्षा एवं सम्मान दिलाने की मांग को परिषद द्वारा प्रमुखता से उठाया गया।

04

बाबा साहेब एवं तथागत गौतम बुद्ध की प्रतिमाओं की सुरक्षा

प्रतिमाओं को क्षति पहुंचाने की घटनाओं के विरोध में धरना-प्रदर्शन एवं ज्ञापन के माध्यम से आवाज उठाई गई।

05

गोविंद ढाबा प्रकरण

व्यवसाय करने के अधिकार, सम्मानपूर्वक जीवन और कानून के समान संरक्षण की मांग को लेकर आवाज उठाई गई।

06

जातिसूचक अपमान के विरुद्ध संघर्ष

जातिसूचक अपमान एवं सामाजिक भेदभाव के विरुद्ध न्याय की मांग को लेकर आंदोलन किया गया।

उत्तर प्रदेश से लेकर देश के विभिन्न राज्यों तक संघर्ष

परिषद का कार्य केवल एक जनपद अथवा एक राज्य तक सीमित नहीं है। जहां भी संगठन के संज्ञान में वंचित समाज के लोगों के साथ अन्याय, उत्पीड़न, भेदभाव या संवैधानिक अधिकारों के हनन का मामला आता है, वहां संगठन उपलब्ध संवैधानिक एवं लोकतांत्रिक माध्यमों से आवाज उठाने का प्रयास करता है।

कानपुर में डॉ. आर.सी. कमल तथा कुशीनगर में श्याम बिहारी गौतम सहित संगठन से जुड़े सामाजिक कार्यकर्ताओं द्वारा भी विभिन्न मामलों में आंदोलन और जनहित के कार्य किए जाने का उल्लेख संगठन करता रहा है।

हमारा भविष्य का संकल्प

“किसी भी व्यक्ति के साथ अन्याय नहीं होने देंगे, किसी पीड़ित की आवाज दबने नहीं देंगे और संविधान में दिए गए अधिकारों की रक्षा के लिए लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक तरीके से निरंतर संघर्ष करेंगे।”

यदि किसी नागरिक का उत्पीड़न होता है, उसके साथ जातिगत भेदभाव किया जाता है, उसके सम्मान को ठेस पहुंचाई जाती है, उसकी संपत्ति या अधिकारों का अतिक्रमण होता है, पुलिस-प्रशासन द्वारा उसकी शिकायत पर उचित कार्रवाई नहीं होती अथवा उसके मौलिक अधिकारों का उल्लंघन होता है, तो परिषद कानूनी और संवैधानिक प्रक्रिया के तहत उसकी आवाज उठाने का प्रयास करेगी।

सड़क से लेकर संसद तक संवैधानिक संघर्ष

परिषद का संकल्प है कि न्याय की लड़ाई गांव से लेकर जिला मुख्यालय तक, तहसील से लेकर शासन तक और आवश्यकता पड़ने पर सड़क से लेकर संसद तक लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक माध्यमों से उठाई जाएगी।

संगठन किसी व्यक्ति, समुदाय या संस्था के विरुद्ध गैरकानूनी कार्रवाई का समर्थन नहीं करता। हमारा मार्ग भारतीय संविधान, कानून, लोकतंत्र, शांतिपूर्ण आंदोलन और न्यायिक प्रक्रिया है।

हमारा मूल मंत्र

जय भीम। जय भारत। जय संविधान। जय लोकतंत्र।

हमारा संकल्प

  • संविधान की रक्षा
  • न्याय की स्थापना
  • समानता का अधिकार
  • सम्मान के साथ जीवन
  • हर पीड़ित को न्याय

हमारी सामाजिक न्याय यात्रा

राष्ट्रीय अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक विकास परिषद यह संकल्प दोहराती है कि जब तक समाज के अंतिम व्यक्ति को न्याय, सम्मान और उसके संवैधानिक अधिकारों की वास्तविक सुरक्षा नहीं मिलती, तब तक सामाजिक न्याय की यह यात्रा निरंतर जारी रहेगी।

राजेश कुमार सिद्धार्थ राष्ट्रीय अध्यक्ष राष्ट्रीय अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक विकास परिषद
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